सुकून की तलाश
कुछ कहना है, कुछ लिखना है, हर चेहरे पे मुस्कान सजाना है। इस ज़िंदगी की दौड़ में बस, खुद को कहीं खोना नहीं है, बस उड़ जाना है। चाह है सुकून की, तन्हाई नहीं, तेरे साथ की, पर मजबूरी नहीं। अकेलेपन से आज़ादी चाहिए, हर पल जीना है, बिन किसी उदासी के साए। हर वो लम्हा जो ज़िंदगी से जुड़ा है, मैं उसे भरपूर जीना चाहती हूँ। जो अंधेरों में भी रोशनी बन साथ चले, इस उलझी राह में रास्ता दिखा सके। जो सीखा दे हर मोड़ पे कुछ नया, जो ले चले वहाँ, जहाँ सिर्फ़ हौसला हो साया। जहाँ ख्वाब डरें नहीं, टूटें नहीं, जहाँ उम्मीदें रोज़ सुबह की तरह जगें। जहाँ खुद से मिलने का वक़्त मिले, और हर एहसास सच्चा लगे। ज़िंदगी बस गुज़र न जाए, हर पल उसमें मेरी भी कहानी हो। कुछ अधूरे ख्वाब हों, कुछ पूरे इरादे, हर सुबह नई उम्मीदों के साथ हो आग़ाज़ मेरे वजूद का। ~Brain Dump